मार्च के दूसरे सप्ताह में रिलीज होगी भोजपुरी फिल्म ‘डमरू’

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भक्‍त और भक्ति की लाइन पर बनी भोजपुरी फिल्‍म ‘डमरू’ इन दिनों चर्चे में है। भोजपुरी सिनेमा में इस फिल्‍म का कंटेंट अपनी आप में अलग है। तभी तो ‘डमरू’ ऐसी पहली फिल्‍म बन गई, जिसने एक राष्‍ट्रीय स्‍तर की वेब साइट में रिलीज से पूर्व की लोकप्रियता में चौथा स्‍थान हासिल करने में सफल रही। इस बारे में फिल्‍म के निर्माता प्रदीप कुमार शर्मा का भी मानना है कि अगर फिल्‍मों के कंटेंट अच्‍छे होंगे और उसके प्रजेंटेशन का स्‍तर उम्‍दा हो तो लोगों को पसंद आयेगी ही। बता दें कि प्रदीप शर्मा भोजपुरी के अलावा हिंदी और मराठी फिल्‍में भी प्रोड्यूस कर चुके हैं।

प्रदीप शर्मा ने बताया कि वे डमरू को होली के बाद मार्च के सेकेंड वीक में रिलीज करेंगे। उन्‍होंने कहा कि हम ‘डमरू’ को एक साथ पुरे भारत में रिलीज करेंगे। इसके लिए हम अपने स्‍तर पर प्रयास कर रहे हैं। मेरी कोशिश ‘डमरू’ को मल्‍टीप्‍लेक्‍स में भी रिलीज कराने की होगी। हम अपनी फिल्‍मों के जरिये भोजपुरी इंडस्‍ट्री में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि मास के साथ – साथ क्‍लास के लोग भी थियेटर तक आयें।

बॉलीवुड फिल्‍मों के स्‍तर पर ‘डमरू’ के प्रोमोशन की है प्‍लानिंग प्रदीप शर्मा कहते हैं कि ‘डमरू’ के लिए प्रोमोशनल एक्टिविटी तो शुरू हो चुकी है। हमने ‘डमरू’ के प्रमोशन के लिए बॉलीवुड फिल्‍मों के स्‍तर की प्‍लानिंग की है। अभी फिल्‍म का टीजर रिलीज हो चुका है, जिसे सोशल मीडिया में काफी अच्‍छा रिस्‍पांस मिला। फिल्‍म के पीआरओ रंजन सिन्‍हा मीडिया इसकी पब्लिसिटी के लिए कमाल का काम कर रहे हैं। हमारी बात कुछ टीवी चैनल्स से चल रही है। इसके अलावा प्रोमोशन के अन्‍य टूलस का भी सहारा लेंगे।

उन्‍होंने दावा किया कि ‘डमरू’ भोजपुरी सिनेमा पर लगने वाले अश्‍लीलता के टैग को अनटैग करेगा। प्रदीप कहते हैं कि जिन लोगों की समझ भोजपुरी के लिए गलत है, वे हमारी इस फिल्‍म को देखकर अपनी सोच जरूर बदलेंगे। हमें लगता है कि भोजुपरी में अश्‍लीलता को पसंद करने वालों की संख्‍या एक भाग में है और इसकी वजह भोजपुरी से दूर होने वाले लोगों की संख्‍या भाग है। मैं उन तीन भाग वालों के लिए फिल्‍में बना रहा हूं, जिसमें महिलाएं और सभ्रांत परिवार से आने वाले लोग आते हैं। वैसे भी जो एक भाग है, उन्‍हें अगर ‘डमरू’ जैसी फिल्‍म मिलेगी, तो वे भी भोंडी फिल्‍मों को देखना बंद कर देंगे।

भोजपुरी सिनेमा में अच्‍छी फिल्‍मों के ना आ पाने के लिए प्रदीप शर्मा डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स को भी जिम्‍मेवार मानते हैं। कहते हें कि भोजपुरी में डिस्‍ट्रीब्‍यूशन का पंगा होता है, जो निर्माताओं के हौसले को क्रश करता है। यह भोजपुरी इंडस्‍ट्री में मेकर्स के लिए बैड फैक्‍टर है। वहीं, उन्‍होंने भोजपुरी के सिंगल हॉल्‍स के बारे में भी चिंता जाहिर की और कहा कि सिंगल थियेटर जहां भोजपुरी फिल्‍में लगती है, वहां मेनटेनेंस और सुविधाओं का अभाव है। इस वजह से बड़ी संख्‍या में लोग थियेटर में नहीं जाते हैं।

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